Friday, April 10, 2009

कुछ रंग...

कुछ रंग साँसों में समां जाते हैं,
कुछ रंग आँखों में बस जातें हैं,
कुछ रंग होंटों पे मुस्कराहट लाते हैं,
कुछ रंग दिल को छु जाते हैं,
कुछ रंग जीवन में समां जाते हैं,
कुछ रंग ताजगी का अहसास करते हैं ,
कुछ रंग सच्चाई की ताकत बनते हैं,
कुछ रंग रिश्तों को मजबूत बनाते हैं,
कुछ रंग कुदरत के करीब लातें हैं,
कुछ रंग इश्वर को दिलों में बसाते हैं,
कुछ रंग इंसानियत को जिंदा रखते हैं,
कुछ रंग सर ऊंचा उठाते हैं,
कुछ रंग बस यूं ही भा जाते हैं...

“Umeed”

क्या कमाल की चीज़ बनाई है उपरवाले ने
“उम्मीद”
कल का सूरज निकलेगा..अपने साथ एक उम्मीद लेकर आएगा ..
ढलते ढलते रात के चाँद को यह ज़िम्मेदारी देगा और कहेगा
“भाई, इस बन्दे की उम्मीद मत तोड़ना
बड़े सालों बाद यह फ़िर से जिंदा हुआ है..
बड़े सालों बाद इसे ज़िन्दगी से फ़िर प्यार हुआ है
बड़े सालों बाद यह खुश नज़र आ रहा है
इसकी उम्मीद मत तोड़ना".
चाँद भी किसी नेता की तरह मुझे आश्वासन देता है
वादों की लोरी सुनाता है और चुप चाप सुबह की रौशनी में खो जाता है…
.......कोई बात नही कल फ़िर दिन होगा, और सूरज वापस…

Thursday, February 26, 2009

In raston ki khaak

In raston ki khaak chaani hai maine,
Har mod pe lamho ko fasane bante dekha hai maine

In galiyon se vaakif hunh main,
Yahan vakt ko bhi ladkhadate dekha hai maine

Gurur ki imararaten tut ke bikhar jaati hain
Imandaari ke khandaharon ko umeed pe tikte dekha hai maine

Chand kagaz ke tukde jinke liye bhai ko marava diya
Aaj unhi ko, kisi thirakte paanv tale dum todte dekha hai maine

Goliyon se chalani us fauji ki vardi ko,
Aaj bhi dhup me sukhte dekha hai maine,

In raston ki khaak chaani hai maine,Har mod pe lamho ko fasane bante dekha hai maine

Friday, November 14, 2008

अच्छी और बुरी यादें.

अच्छी और बुरी यादें दो नन्ही सहेलियों की तरह हैं. साथ साथ हाथों में हाथे डाले पूरा दिन इठलाती, इतराती, गाव की गलियों से, स्कूल के मैदानों से, शहर की सड़कों पर दौड़ती रहती हैं।
एक को बुलाओ तो दूजी ख़ुद बा ख़ुद दौडी चली आती है। एक से बात करो तो दूसरी से भी बतियाना पड़ता है। एक रूठती है तो दूसरी को भी मानना पड़ता है। ऐसे हालत में मन करता है दोनों को दूर कहीं बोर्डिंग स्कूल में भेज दो। कम से कम परेशान तो नही करेंगी। लेकिन हैं तो दोनों एक ही बाप की औलादें कैसे अपने कलेजे के टुकडों को बाँट दे। अच्छी और बुरी दोनों ही यादों के साथ ही रहना पड़ता है।

Tuesday, November 11, 2008

यह न पूछो

यह न पूछो कब होगा। जब होना है तब होगा। हो सकता है अब होगा, फिर न जाने कब होगा। हाथ हिलाओ तब होगा। कदम बढाओ तब होगा दिल की सुनो तब होगा। रब चाहेगा तब होगा, जो मांगोगे सब होगा। यह न पूछो कब होगा। जब होना है तब होगा। हो सकता है अब होगा, हो सकता है तब होगा, भाई जब होना है तब होगा । अब यह न पूछो कब होगा। जब होना है तब होगा।

Locker

Kal sham kisi ne jehan ke kone me rakha ek locker jo barson se band pada tha use khol diya. Saari yaden bhadbhada ke gir gayeen aur poore farsh per bikhar gayeen…aur hamesh ki tarah meri raat unhe bator kar sahej kar rakhne me beet gayee. Kuch yadon par vakt ki dhool thi to kuch par halaton ka brown cover chadha kar rakha tha. Vo bhi kinaron se phat raha tha. Kinhi par samjhauton ka cello tape laga hua tha kisi par jabardasty ka fevicol laga tha. Ek ek kar ke unhe sametane me kayeen saphe khulte gaye aur dastane phir ankho ke 70mmparde par nach uthi…Zahir hai so na saka…Magar ab locker band nahi ho rah. Achcha hai. Khula hi rahne do..

Monday, September 1, 2008

एक बार फ़िर दिल और दिमाग में जँग छिड गयी ...

दिमाग का कहना था की तुम क्या छोटी छोटी बातों में खुश रहते हो ...कुछ बड़ा सोचो..बड़ा ख्वाब देखो..बड़ी खुशियों के बारे में सोचो ...दिल ने जवाब दिया भाई यह सब काम तो तुम्हारा है मैं तो छोटी छोटी खुशियों में ही खुश रहता हूँ ..छोटी गाड़ी, छोटा परिवार, छोटी सी दुनिया मैं इन सब में खुश रहता हूँ और एक बात का जवाब दो की अगर बड़ा ख्वाब देखा और वो पूरा हो गया तो तुम बड़े खुश होगे या छोटे खुश होगे। बात साफ़ है सिर्फ़ खुश होगे। खुशी - बड़ी या छोटी नही होती उसे हम बड़ी या छोटी बनते हैं। दिमाग के पास जवाब नही था एक ही बात बोली यार कुछ भी कहो मैं कितना भी बड़ा सोंचू पर कद में तो तुम ही मुझसे बड़े रहोगे / आदमी का दिल अगर बड़ा है तो सोच अपने आप बड़ी हो जाती है।