Monday, September 1, 2008
एक बार फ़िर दिल और दिमाग में जँग छिड गयी ...
दिमाग का कहना था की तुम क्या छोटी छोटी बातों में खुश रहते हो ...कुछ बड़ा सोचो..बड़ा ख्वाब देखो..बड़ी खुशियों के बारे में सोचो ...दिल ने जवाब दिया भाई यह सब काम तो तुम्हारा है मैं तो छोटी छोटी खुशियों में ही खुश रहता हूँ ..छोटी गाड़ी, छोटा परिवार, छोटी सी दुनिया मैं इन सब में खुश रहता हूँ और एक बात का जवाब दो की अगर बड़ा ख्वाब देखा और वो पूरा हो गया तो तुम बड़े खुश होगे या छोटे खुश होगे। बात साफ़ है सिर्फ़ खुश होगे। खुशी - बड़ी या छोटी नही होती उसे हम बड़ी या छोटी बनते हैं। दिमाग के पास जवाब नही था एक ही बात बोली यार कुछ भी कहो मैं कितना भी बड़ा सोंचू पर कद में तो तुम ही मुझसे बड़े रहोगे / आदमी का दिल अगर बड़ा है तो सोच अपने आप बड़ी हो जाती है।
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5 comments:
बहुत ही सही बात
पर दिल की कौन सुनता है
खूब लिखा है आपने. बधाई. स्वागत मेरे ब्लॉग पर भी.
Dil aur Dimaaj ke bich Chhidi jung ka varnan aapane bakhoobi se kiya hai!.... ek achchhi rachana!
बात तो आप सही कह रहे हैं। खैर... खुशियों की ढेर सारी तितलियां आपके कंधों पर बैठें और आप अपने आस पास का माहौल भी खुशनुमा बना दें....आमीन।
jang buri baat hai, narayan narayan
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